देवभोग – गरियाबंद जिले के देवभोग विकास खण्ड अंतर्गत तेल नदी पार छत्तीस गांवों के मुख्यालय ग्राम पंचायत झाखरपारा में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय एवं व्यावसायिक घरेलू उपयोग खाद्य सामग्री किराना स्टोर स्थित है। तथा प्रति सप्ताह शनिवार को सप्ताहिक बाजार बैठती है, घरेलू जरूरतों और स्कूली बच्चों को स्कूल आवागमन करने में दूभर हो गया है। यह मामला है खोकसरा से केन्दूवन मार्ग एवं डूमरबाहाल से केन्दूवन कच्ची मिट्टी सड़क अब पूरी तरह से बड़े-बड़े गड्ढे में तब्दील हो चुकी है। स्कूली बच्चों व ग्रामीणों ने बताया कि झाखरपारा में हायर सेकंडरी स्कूल संचालित हो रही है, तो क्षेत्र के दर्जनों गांवों से बच्चे दसवीं उत्तीर्ण होकर ग्यारहवीं व बारहवीं कक्षा में पढ़ने के लिए भारी संख्या में आते है। अब झाखरपारा में आत्मानंद स्कूल भी खुल चुकी है, तो पढ़ने लिखने के लिए छोटे-छोटे बाल बच्चे भी खतरनाक सड़क से हर रोज चार पहिया वाहनों में सवार होकर बड़े- बड़े गड्ढे से संघर्ष कर गुजरते हैं। ऐसा मुसीबत न आ जाए, कि वाहन चालक वाहन को चलाते- चलाते कहीं अचानक ही ड्राइव से अनियंत्रित होकर नियंत्रित खो न जाए और किसी बड़ी घटनाओं को अंजाम दे। इस लिए समय को देखते हुए विपत्ति को पहल करना चाहिए, क्योंकि घटना किसी को इंतजार करने को नहीं कहती है,कब क्या होगा इसका अंदाजा कोई नहीं लगा सकते। ग्रामीणों ने और भी यह बताया कि देवभोग क्षेत्र में तेल नदी पार छत्तीस गांवों के हर पहुंच मार्ग इतना बदहाल है, कि ग्रामीण जनों को बड़ी सी बड़ी कठिनाइयों का सामना कर गुजरने में मजबूर हैं।इन बदहाली सड़कों की दुर्दशा को लेकर क्षेत्रवासियों ने अनेकों बार विभागों और जनप्रतिनिधियों को अवगत करा चुके हैं।हर बार सड़क की दूरगति को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने में हर अखबारों और चैनलों के माध्यम से दिखाया जा रहा है। फिर भी शासन-प्रशासन उबड़-खाबड़ बड़े बड़े गड्ढे में तब्दील सड़कों को दुरुस्त करने में कोई रुचि नहीं दिखा रही हैं।इन सड़कों से उच्च कक्षाओं में पढ़ने वाले स्कूली बच्चे साईकिल से आवागमन करते हैं, कीचड़ मिट्टी व गंदगी पानी से लतपथ होकर गुजरते हैं। अब ऐसा हालात बन गया है कि मोटर साइकिल व साइकिल से गुजरते वक्त पहिया कहीं गढ्ढे में जा कर फस न जाए। और बड़ी घटनाओं को दावत न दे। उक्त ग्रामीणों ने बताया कि यदि इसी महीने में सड़कों की हालत सुधर नहीं जाती, इस क्षेत्र के पूरे जनता अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।इसकी जिम्मेदारी स्वयं शासन-प्रशासन की होगी।
