देवभोग – प्राथमिक साख सहकारी समिति झाखरपारा में लगातार कई वर्षो से किसान खाद बीज और ऋण उपलब्ध नहीं होने से दोहरी मार झेल रहे हैं। इस साल अप्रैल महीने तक खाद बीज और ऋण उपलब्ध हो जाना चाहिए था, लेकिन समिति की कमजोरी वजह से आज दिन पर्यन्त तक शत् प्रतिशत लाभान्वित नहीं हो सकें है। समिति के कर्मचारी ने बताया कि झाखरपारा मंडी में कुल टोटल पंजीकृत किसान 800 से ज्यादा है तो जिसमें ऋण स्वीकृत 206 किसानों को दी जा चुकी है, और अभी बाकी किसान 350 का पेंडिंग पड़ा हुआ है। वंचित किसानों ने बताया कि खेतों में धान बोआई करना अंतिम पड़ाव आ गया है फिर भी समिति द्वारा अभी तक ऋण उपलब्ध नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि बैंक से लोन स्वीकृत नहीं होने से अपने घर की ज्वेरात को पांच प्रतिशत ब्याज में गिरवी रख कर पैसा को खेती किसानी में खर्च किया गया है,यदि किसान समिति के भरोसे पर निर्भर करता तो खेती खलिहान खाली पड़ी रहती। फिर भी आज दिन तक 350 किसानों को ऋण उपलब्ध नहीं हो पाया है, किसान ऋण के लिए 14 तारीख, मंगलवार को 10.00 बजे से लेकर शाम 3.45 तक आफिस दफ्तर के चक्कर काटते रहे, फिर भी काम सफल नहीं हुआ तो सभी किसान दुखित होकर अपने घरों को लौट आए। उक्त किसानों ने बताया कि देवभोग विकास खण्ड में जितने भी समितियां है तो संबंधित सेक्टर के किसानों को खाद बीज और ऋण शत् प्रतिशत लाभ उपलब्ध कराया जा चुका है। लेकिन हमारे झाखरपारा समिति में अभी तक 350 किसान ऋण पैसा के लिए समिति और बैंक को हजारों बार चक्कर लगा रहे है फिर भी सक्रिय रूप से सफल प्रक्रिया अबतक सुलझ नहीं पाई है।जब इसका कारण पूछा गया तो जिम्मेदार कर्मचारियों ने एक दूसरे को दोषी ठहराया जा रहा है। झाखरपारा प्राथमिक साख सहकारी समिति में नवनियुक्त समिति प्रबंधक ने बताया कि मुझे समिति ने 26 जून को नियुक्त किए हैं, प्रभारी में अभय नागेश को समिति प्रबंधक पद पर कार्यभार सौंपा गया था।उसे के कार्यकाल का यही हाल रहा है कि अब तक साठ प्रतिशत किसान को समिति द्वारा उपलब्ध खाद बीज और ऋण नहीं मिल पायी है। किसान अपने खेतों में धान बोआई और रोपाई के लिए घरों में रखी गई आभूषणों को गिरवी रख कर खेती किसानी किया गया।अब इतनी बड़ी लापरवाही हुई है कि किसान के आंखों में आसूं की धारा बहने लगी है, किसान सिर पर हाथ रखकर तड़प-तड़प के रो रहे है,ये रो रहे हैं बुझाने वाला कोई नहीं है। चुकी किसान समिति से ही हमेशा आत्मनिर्भर बनाए रखते हैं, लेकिन इन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। अबतक न ही खाद बीज और ऋण उपलब्ध हुई है, कुछ किसानों को लाभ मिल चुका है लेकिन अभी भी 350 किसान समिति से लाभ लेनें में काफी पिछड़ गए है।
